Bihar Vidhansabha chunav 2025 के एग्जिट पोल्स में लगभग सभी सर्वेक्षणों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाया है। अधिकांश एजेंसियों ने गठबंधन को 130 से अधिक सीटें दी हैं, जबकि बहुमत के लिए 122 सीटों की आवश्यकता होती है।

हालांकि, 14 नवंबर को जब चुनाव आयोग (ECI) द्वारा वास्तविक नतीजे घोषित होंगे, तो तस्वीर पूरी तरह बदल भी सकती है। आइए जानते हैं — आखिर ऐसे कौन से कारण हैं जिनसे एग्जिट पोल गलत साबित हो सकते हैं, और क्यों तेजस्वी यादव के लिए अभी भी उम्मीद बाकी है
10. कारण, जिनसे एग्जिट पोल्स पलट सकते हैं
1. मुख्यमंत्री का चेहरा स्पष्ट नहीं
NDA ने इस बार नीतीश कुमार को स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया है, जबकि महागठबंधन (MGB) ने तेजस्वी यादव को सामने रखा। People’s Pulse के सर्वे में बताया गया कि तेजस्वी यादव को 32% लोगों ने सीएम के रूप में पसंद किया, जबकि नीतीश कुमार को 30% — यानी जनता का झुकाव अभी भी तेजस्वी की ओर है।
2.रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा
बेरोजगारी बिहार के सबसे गंभीर मुद्दों में से एक रही है। tejasvi yadav का हर परिवार को सरकारी नौकरी देने का वादा युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। उन्होंने कहा था कि सत्ता में आते ही 20 दिन के भीतर कानून लाएंगे — यह युवाओं और पहली बार वोट देने वालों को अपनी ओर खींच सकता है।
3.महिलाओं का झुकाव
महागठबंधन ने महिलाओं के लिए ‘मां-बहन योजना’ जैसी योजनाएं पेश कीं — जिसमें ₹2,500 की मासिक सहायता और मकर संक्रांति पर ₹30,000 का बोनस देने का वादा किया गया।
हालांकि, एनडीए ने भी चुनाव से ठीक पहले 1.51 करोड़ महिलाओं को ₹10,000 की सहायता दी — जिससे मुकाबला कांटे का हो गया है।
4. Jaatiwad समीकरणों में बदलाव
बिहार की राजनीति में जाति हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती है। इस बार कुशवाहा समुदाय को महागठबंधन में ज्यादा टिकट दिए गए, जिससे उनका रुझान विपक्ष की ओर झुक सकता है।
5. Prashant Kishore का जन सुराज फैक्टर
‘जन सुराज’ अभियान एनडीए के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार के 20 साल के शासन को निशाने पर लिया है। उनका अभियान भले ही दोनों गठबंधनों के खिलाफ हो, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान एनडीए को हो सकता है।
6.Mukesh Shahani का प्रभाव
निषाद समुदाय के नेता मुकेश सहनी को महागठबंधन ने डिप्टी सीएम का पद देने का वादा किया है। पिछली बार वे एनडीए में थे, लेकिन अब उन्होंने आरजेडी और महागठबंधन के उम्मीदवारों का खुलकर समर्थन किया है। यह निषाद वोटों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।
7. नए समुदायों का समर्थ
इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी (IIP) के अध्यक्ष इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता, जो तांती, तत्त्व और पान समुदाय से आते हैं, अब महागठबंधन में शामिल हो गए हैं। इन समुदायों के जुड़ने से विपक्ष का वोट बैंक और मजबूत हुआ है।
8.एनडीए की आर्थिक योजनाओं पर सवाल
NDA ने पिछड़े वर्गों के लिए ₹10 लाख की सहायता योजना का वादा किया है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह 20 साल के “कमज़ोर विकास” को छिपाने का प्रयास है। यह मुद्दा कई इलाकों में मतदाताओं की धारणा बदल सकता है।
9. पिछड़े वर्गों को लेकर महागठबंधन का वादा
महागठबंधन ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि तांती, तत्त्व, निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, लोहार, नाई, कुंभार, माली, हलवाई, और कई अन्य जातियों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ₹10 लाख की सहायता दी जाएगी। इससे इन समुदायों में नई उम्मीद जगी है।
10. पिछड़े वर्ग निर्णायक
एनडीए ने भी पिछड़ों की स्थिति पर अध्ययन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का वादा किया है।
बिहार की 36% आबादी अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) की है, जो परिणाम तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। तेजस्वी यादव ने लगातार इन समुदायों से जुड़ाव बढ़ाया है — जिससे माहौल उनके पक्ष में जा सकता है।
नतीजा क्या होगा?
Bihar की जनता हमेशा अप्रत्याशित फैसले देती आई है। एग्जिट पोल्स भले ही NDA को आगे दिखा रहे हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग कहानी कहती है।
अगर जातिगत समीकरण, महिला वोट, और युवाओं की बेरोजगारी जैसे मुद्दे निर्णायक बने — तो tejasvi yadav 2025 की सबसे बड़ी राजनीतिक चौंकाने वाली जीत दर्ज कर