Uttar Pradesh की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब Shankaracharya स्वामी Avimukteshwarananda सरस्वती को लेकर राज्य सरकार के भीतर ही विरोधा भासी बयान सामने आए। एक ओर CM Yogi Adityanath ने Avimukteshwarananda पर अप्रत्यक्ष रूप से तीखा हमला करते हुए उन्हें कालनेमि जैसा बताया वहीं दूसरी ओर UpMukhymantri Keshav Prashad Mourya ने उन्हें भगवान Shankaracharya कहकर सम्मानित किया। इन दो बयानों ने यह संकेत दे दिया है कि इस मुद्दे पर सरकार के भीतर एकराय नहीं है।

Yogi Adityanath का सख्त रुख
CM Yogi Adityanath ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान धर्म और सनातन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सनातन परंपरा को बदनाम करने वाले तत्व कालनेमि की तरह होते हैं जो साधु-संतों का भेष धरकर समाज को भ्रमित करते हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन राजनीतिक और धार्मिक में इस बयान को सीधे तौर पर Avimukteshwarananda से जोड़कर देखा गया।
Yogi Adityanath के इस बयान को उन विवादित बयानों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है जिनमें Shankaracharya ने हाल के दिनों में सरकार की कुछ नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाए थे।
Keshav Prasad maurya का समर्थन
वहीं UpMukhymantri Keshav Prasad maurya ने बिल्कुल विपरीत रुख अपनाते हुए Avimukteshwarananda को भगवान Shankaracharya बताया और कहा कि संतों का सम्मान करना सनातन परंपरा का मूल है। maurya ने कहा कि Shankaracharya समाज को दिशा देने वाले आध्यात्मिक गुरु होते हैं और उनके विचारों को सुना जाना चाहिए भले ही उनसे सहमति न हो। मौर्य के इस बयान को Yogi Adityanath के रुख से अलग माना जा रहा है जिससे यह स्पष्ट होता है कि BJP सरकार के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग सोच मौजूद है।
राजनीतिक और धार्मिक निहितार्थ
राजनीतिक का मानना है कि यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरणों से भी जुड़ा है। Shankaracharya Avimukteshwarananda का प्रभाव खासतौर पर धार्मिक वर्ग और सनातन
समर्थकों में माना जाता है। ऐसे में सरकार के भीतर से ही उनके खिलाफ और समर्थन में बयान आना विपक्ष को भी मुद्दा देने वाला साबित हो सकता है। विपक्षी दलों ने इस मतभेद को BJP की आंतरिक खींचतान करार दिया है और सवाल उठाया है कि सरकार संतों के सम्मान को लेकर एकजुट क्यों नहीं है।
सरकार के लिए चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने Yogi Adityanath सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है कैसे संत समाज और राजनीतिक प्रशासन के बीच संतुलन बनाया जाए। एक तरफ सरकार अनुशासन और प्रशासनिक नियंत्रण की बात करती है तो दूसरी ओर धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का सवाल भी जुड़ा हुआ है।
Avimukteshwarananda को लेकर
CM Yogi Adityanath और Keshav Prasad maurya के अलग बयान यह दिखाते हैं कि Uttar Pradesh सरकार के भीतर इस मुद्दे पर सहमति नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि BJP इस विवाद को कैसे संभालता है और क्या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक एकजुट रुख सामने आता है या नहीं।