प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में कहा कि India वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक भरोसेमंद और उभरते हुए साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने यह बात एक अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सम्मेलन के दौरान कही जहां दुनिया भर के उद्योग विशेषज्ञ निवेशक और नीति निर्माता मौजूद थे।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र क्यों है महत्वपूर्ण
सेमीकंडक्टर आज की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। मोबाइल फोन कंप्यूटर ऑटोमोबाइल रक्षा उपकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में इनका व्यापक उपयोग होता है। Covid-19 महामारी के दौरान सप्लाई चेन प्रभावित होने से चिप्स की भारी कमी देखी गई जिसके बाद दुनिया के कई देशों ने सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भरता और विविधता पर जोर देना शुरू किया।
इसी संदर्भ में भारत ने भी इस क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक नीतिगत कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत न केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार है बल्कि अब उत्पादन और डिजाइन का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सरकारी योजनाओं से मिल रहा प्रोत्साहन
भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं। इनमें उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना विशेष आर्थिक पैकेज और विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए नियमों में ढील शामिल है। India Semiconductor Mission के तहत देश में चिप निर्माण डिजाइन और पैकेजिंग से जुड़े उद्योगों को वित्तीय सहायता और तकनीकी समर्थन प्रदान किया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाना है।
वैश्विक कंपनियों की बढ़ती रुचि
प्रधानमंत्री ने बताया कि दुनिया की कई प्रमुख तकनीकी कंपनियां भारत में निवेश करने में रुचि दिखा रही हैं। भारत का विशाल बाजार कुशल इंजीनियरों की उपलब्धता और स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था इसे निवेश के लिए आकर्षक बनाती है। Taiwan Semiconductor Manufacturing Company Intel और Micron Technology जैसी कंपनियां पहले ही भारत में सहयोग और निवेश के अवसर तलाश रही हैं। इन कंपनियों की भागीदारी से देश में उन्नत तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
रोजगार और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास से लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। चिप डिजाइन परीक्षण पैकेजिंग और निर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उच्च कौशल वाले पेशेवरों की मांग बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की युवा आबादी और मजबूत आईटी सेक्टर इस उद्योग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। देश के कई तकनीकी संस्थान पहले से ही माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और चिप डिजाइन से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम शुरू कर चुके हैं जिससे उद्योग को आवश्यक प्रतिभा मिल सके।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भरोसेमंद साझेदार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने भारत को एक स्थिर और विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखना शुरू कर दिया है। भूराजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता के बीच कंपनियां अपने उत्पादन केंद्रों को विविध बनाना चाहती हैं और भारत इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए उपयुक्त विकल्प बनकर उभरा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की नीतिस्थिरता पारदर्शी शासन और तेजी से विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा विदेशी निवेशकों को भरोसा देता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारत का लक्ष्य केवल घरेलू मांग पूरी करना नहीं बल्कि बाजार में प्रतिस्पर्धी निर्यातक बनना है।
तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत के व्यापक आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी हिस्सा है। सरकार का मानना है कि महत्वपूर्ण तकनीकों में विदेशी निर्भरता कम करने से राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों मजबूत होंगी। इस दिशा में देश में चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कई भारतीय स्टार्टअप अब चिप डिजाइन और एम्बेडेड सिस्टम के क्षेत्र में नवाचार कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह
बयान इस बात का संकेत है कि भारत सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। सरकारी नीतियों विदेशी निवेश और घरेलू प्रतिभा के संयोजन से आने वाले वर्षों में भारत इस क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बन सकता है।
यदि वर्तमान योजनाएं सफलतापूर्वक लागू होती हैं तो भारत न केवल अपनी तकनीकी जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि विश्व बाजार में एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित होकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका और अधिक सुदृढ़ करेगा।










