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होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने पर भारत ईरान वार्ता की सराहना विदेश मंत्री ने कूटनीति को बताया असरदार

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March 16, 2026 8:49 AM
होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने पर भारत ईरान वार्ता की सराहना विदेश मंत्री ने कूटनीति को बताया असरदार
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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच भारत ने Iran के साथ हुई वार्ता को महत्वपूर्ण बताते हुए सकारात्मक संकेत दिए हैं। भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने कहा है कि तेहरान के साथ सीधे संवाद से Strait of Hormuz में जहाज़ों की आवाजाही को फिर से शुरू करने की दिशा में प्रगति हुई है। भारत और ईरान के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत के बाद कुछ भारतीय जहाज़ इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित रूप से गुजरने में सफल रहे। विदेश मंत्री ने इस प्रक्रिया को कूटनीति की सफलता बताते हुए कहा कि बातचीत और संवाद ही ऐसे संकटों का स्थायी समाधान निकाल सकते हैं।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। विशेषज्ञों के अनुसार तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है। इसलिए यदि इस रास्ते में किसी भी प्रकार का अवरोध पैदा होता है तो उसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत के लिए यह मार्ग और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी तेल और गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है।

भारत ईरान बातचीत का महत्व

Subrahmanyam Jaishankar ने कहा कि भारत और Iran के बीच सीधे संवाद से सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। उन्होंने बताया कि बातचीत के बाद भारतीय झंडे वाले कुछ गैस और तेल टैंकर इस मार्ग से गुजर पाए जिससे ऊर्जा आपूर्ति की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया जा सका।

उन्होंने यह भी कहा कि यह किसी प्रकार के समझौते या सौदेबाजी का परिणाम नहीं है बल्कि दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद का परिणाम है। भारत का मानना है कि क्षेत्रीय संकटों का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि कूटनीति और बातचीत से ही संभव है।

वैश्विक तनाव का असर

मध्य पूर्व में हाल के समय में बढ़ते सैन्य तनाव ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इस क्षेत्र में United States Israel और Iran के बीच बढ़ते टकराव ने कई जहाज़ों की आवाजाही को प्रभावित किया है। इसी कारण कुछ देशों ने इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया है। हालांकि भारत ने लगातार कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए Strait of Hormuz में किसी भी प्रकार का व्यवधान सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। सरकार इस संकट के दौरान लगातार विभिन्न देशों से संपर्क बनाए हुए है ताकि तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। साथ ही भारत वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा आयात बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रहा है।

कूटनीति को बताया समाधान

विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकटों में संवाद और कूटनीति बेहद जरूरी होती है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत अपनी कूटनीतिक पहल के अनुभव अन्य देशों के साथ भी साझा कर सकता है, जो इस संकट के समाधान के लिए प्रयास कर रहे हैं।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव

के बीच भारत और Iran के बीच हुई बातचीत को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि Strait of Hormuz में जहाज़ों की आवाजाही सामान्य होती है तो इससे न केवल भारत बल्कि ऊर्जा बाजार को भी राहत मिल सकती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कूटनीतिक प्रयास क्षेत्रीय तनाव को कम करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने में कितने सफल होते हैं।

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