Russi राष्ट्रपति Vladimir Putin की इस सप्ताह होने वाली भारत यात्रा से ठीक पहले, रूस की संसद ने भारत के साथ एक अहम सैन्य लॉजिस्टिक समझौते को मंजूरी दे दी है। यह मंज़ूरी दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए मोड़ पर ले जाने वाली मानी जा रही है।
Drama ने RELOS समझौते को हरी झंडी दी
Russ की निचली सदन स्टेट डूमा ने 2 December को Reciprocal Exchange of Logistic Support (RELOS) समझौते की पुष्टि कर दी। यह समझौता 18 February को भारत और रूस के बीच हस्ताक्षरित हुआ था और पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने इसे डूमा के पास मंजूरी के लिए भेजा था।
स्टेट डूमा के स्पीकर वियाचेस्लाव वोलोडिन ने बैठक के दौरान कहा: भारत हमारे लिए रणनीतिक और व्यापक साझेदार है। आज की मंजूरी हमारे संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
RELOS समझौता क्या है?
RELOS एक ऐसा ढांचा तैयार करता है जिसके तहत:
दोनों देशों की सेना, युद्धपोत और सैन्य विमान एक-दूसरे के देश में प्रवेश कर सकते हैं। सैनिकों, उपकरणों और सैन्य संसाधनों के आवागमन के नियम तय किए जाते हैं। आपसी लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसे ईंधन मरम्मत, भोजन, मेडिकल सपोर्ट आदि साझा किया जा सकेगा।
यह प्रक्रिया इन परिस्थितियों में लागू होगी:
. संयुक्त सैन्य अभ्यास
. प्रशिक्षण
. मानवीय सहायता
प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदाओं के दौरान राहत कार्य और अन्य सहमति-आधारित मिशन
डूमा की वेबसाइट पर प्रकाशित नोट में कहा गया है कि यह मंजूरी दोनों देशों के एयरस्पेस के पारस्परिक उपयोग और भारतीय व रूसी युद्धपोतों के पोर्ट कॉल्स को आसान बनाएगी।
Putin की दो दिवसीय भारत यात्रा
राष्ट्रपति व्लादिमीर Putin 4–5 December तक भारत के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे:
. राष्ट्रपति Drohpatty murmur
. PM Narendra Modi
. से मुलाकात करेंगे।
Putin 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जहां व्यापार, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और सामरिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएं होंगी। राष्ट्रपति Murmur उनके सम्मान में राज्य भोज भी देंगी।
यह Putin की 2021 के बाद पहली भारत यात्रा होगी। दोनों नेता आखिरी बार सितंबर 2025 में तिआंजिन, चीन में SCO सम्मेलन के दौरान मिले थे।
कई नए समझौते होने की उम्मीद
क्रेमलिन ने पहले ही संकेत दिया था कि: दोनों देश एक संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं कई सरकारी और व्यावसायिक समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे नागरिक परमाणु ऊर्जा रक्षा सहयोग और दीर्घकालिक रणनीतिक भागीदारी पर नई प्रगति संभव है
