America Tairiff चिंताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से Indian Share market में गिरावट

Indian share Market में एक बार फिर दबाव देखने को मिला जहां America की संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। सप्ताह के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और Nifty दोनों ही लाल निशान में बंद हुए।

 

Indian share Market में एक बार फिर दबाव देखने को मिला जहां America
Indian share Market में एक बार फिर दबाव देखने को मिला जहां America: photo by BiharTakk 

Market पर क्यों बढ़ा दबाव?

विशेषज्ञों के अनुसार America प्रशासन की ओर से आयात शुल्क (Tairiff) को लेकर कड़े रुख की आशंका से वैश्विक बाजारों में सतर्कता का माहौल है। इसका असर उभरते बाजारों पर भी पड़ा है जहां विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) जोखिम कम करने के लिए लगातार शेयरों की बिकवाली कर रहे हैं।

Indian share Market में हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों द्वारा की गई भारी निकासी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

 विदेशी निवेशकों की भूमिका

Share Market Deta के मुताबिक पिछले कुछ सत्रों में विदेशी निवेशकों ने Indian Ecwitiy Market से बड़ी रकम निकाली है। Dollar की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण विदेशी पूंजी का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।

 किन Sectors पर असर?

Market की गिरावट का सबसे ज्यादा असर:

. IT Sector 

. मेटल Share 

. Auto और कैपिटल गुड्स

पर देखने को मिला। वहीं FMCG और फार्मा जैसे डिफेंसिव Sectors ने कुछ हद तक गिरावट को संभालने की कोशिश की।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

Market का मानना है कि जब तक America टैरिफ नीति को लेकर स्पष्टता नहीं आती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह गिरावट चुनिंदा मजबूत Share में निवेश का मौका भी बन सकती है।

 विशेषज्ञों की राय

घरेलू आर्थिक संकेतक फिलहाल स्थिर हैं लेकिन वैश्विक कारक Share market की दिशा तय कर रहे हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाज़ी में फैसले न लें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान केंद्रित करें।

America टैरिफ को लेकर

बनी आशंकाएं और विदेशी पूंजी की निकासी फिलहाल Indian market के लिए चुनौती बनी हुई हैं। अल्पकाल में बाजार में दबाव रह सकता है लेकिन लंबी अवधि में भारत की आर्थिक स्थिति निवेशकों को फिर से आकर्षित कर सकती है।

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