मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई जिसमें देश की सुरक्षा ऊर्जा आपूर्ति और विदेशों में रह रहे भारतीयों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय जहाज़ों का आवागमन जारी रहेगा और Strait of Hormuz से और अधिक जहाज़ सुरक्षित रूप से गुजरने की तैयारी की जा रही है।
बैठक की अध्यक्षता रक्षा और विदेश मामलों से जुड़े वरिष्ठ मंत्रियों ने की जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मौजूदा स्थिति की जानकारी दी गई और उनकी राय भी सुनी गई।
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष जोर
सरकार ने बैठक में यह दोहराया कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि मध्य पूर्व के संवेदनशील इलाकों में स्थित भारतीय दूतावास लगातार भारतीय समुदाय के संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारियां भी की गई हैं।
विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने कहा कि सरकार स्थिति पर 24 घंटे नजर रखे हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए समन्वित योजना तैयार है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही जारी
बैठक में यह जानकारी दी गई कि भारत के ऊर्जा और व्यापार के लिए Strait of Hormuz अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और गैस इसी मार्ग से होकर आता है। सरकार ने कहा कि नौसेना और तटरक्षक बल जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत जहाज़ों की आवाजाही सामान्य बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष ने मांगी विस्तृत जानकारी
सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार से मौजूदा हालात पर नियमित अपडेट देने और संभावित जोखिमों के बारे में स्पष्ट जानकारी साझा करने की मांग की। उनका कहना था कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो संसद और जनता को समय पर जानकारी मिलनी चाहिए। कुछ नेताओं ने यह भी सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो भारतीय नागरिकों को स्वदेश वापस लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए जैसा कि पहले संकट के समय किया जा चुका है।
ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक प्रभाव पर चर्चा
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है। सरकार ने बताया कि देश के पास पर्याप्त सामरिक भंडार मौजूद है और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर भी काम किया जा रहा है। यह आश्वासन दिया गया कि किसी भी परिस्थिति में देश के भीतर पेट्रोल डीजल और एलपीजी की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी।
भारतीय नौसेना की भूमिका
सरकार ने बताया कि भारतीय नौसेना क्षेत्र में तैनात है और वह न केवल भारतीय जहाज़ों बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में भी सहयोग कर रही है। नौसेना द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार जहाज़ों को सुरक्षित मार्गों से गुजरने और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों से बचने की सलाह दी गई है।
राष्ट्रीय सहमति का संदेश
सर्वदलीय बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी था कि इस संवेदनशील मुद्दे पर देश के भीतर राजनीतिक एकजुटता दिखाई दे। बैठक के बाद कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा के मामले में सभी दल सरकार के साथ हैं।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच
सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत इस स्थिति को गंभीरता से ले रहा है और सभी स्तरों पर तैयारियां कर रहा है। Subrahmanyam Jaishankar के नेतृत्व में विदेश मंत्रालय और रक्षा तंत्र लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं जबकि Strait of Hormuz से भारतीय जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार का यह रुख न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की जिम्मेदार छवि को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि संकट की घड़ी में देश अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।









