Supreme court ने Ujjain स्थित Mahakaleshwar Jyotirling Mandir में VIP दर्शन व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत के इस फैसले से मंदिरों में विशेष दर्शन व्यवस्था को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

क्या थी याचिका?
याचिका ने अपील दी थी कि Mahakal Mandir में VIP दर्शन की व्यवस्था समानता के अधिकार के खिलाफ है और इससे आम श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में घंटों इंतज़ार करना पड़ता है। याचिका में कहा गया था कि धार्मिक स्थलों पर सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन का अधिकार होना चाहिए।
Supreme court का रुख
Supreme court ने इस याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला और प्रशासनिक निर्णय के दायरे में आता है। अदालत ने संकेत दिया कि मंदिर प्रबंधन और राज्य सरकार को ऐसी व्यवस्थाएं तय करने का अधिकार है जब तक वे कानून के दायरे में हों।
प्रशासनिक व्यवस्था का मामला
भीड़ प्रबंधन सुरक्षा और विशेष अवसरों को देखते हुए कुछ विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं जिन्हें सीधे तौर पर संवैधानिक उल्लंघन नहीं किया जा सकता। इसलिए इस विषय में न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक नहीं समझा गया।
देशभर में VIP दर्शन पर बहस
देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे Tirupati Balaji Vaishnodevi और Mahakal Mandir में VIP दर्शन की व्यवस्था पहले से लागू है। इसे लेकर समय पर समानता और आस्था से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।
Supreme court के इस फैसले के बाद
Ujjain Mahakal Mandir में VIP दर्शन व्यवस्था जारी रहेगी। अदालत के रुख से यह साफ हो गया है कि धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में नीतिगत निर्णयों पर न्यायालय सीमित हस्तक्षेप करेगा।