प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में देशवासियों को बढ़ते साइबर अपराधों खासकर डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और यह पूरी तरह से ठगों द्वारा फैलाया गया झूठ है।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट स्कैम
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस स्कैम में अपराधी खुद को पुलिस सीबीआई ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल करते हैं। वे किसी फर्जी केस मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध गतिविधि का डर दिखाकर कहते हैं कि व्यक्ति डिजिटल रूप से गिरफ्तार हो चुका है। इसके बाद वे तुरंत पैसे ट्रांसफर करने या बैंक डिटेल साझा करने का दबाव बनाते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे कॉल्स का मकसद सिर्फ डर पैदा करना और जल्दबाज़ी में गलत फैसला करवाना होता है।
डर और भ्रम के जरिए ठगी
प्रधानमंत्री ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों की जानकारी की कमी और घबराहट का फायदा उठाते हैं। कई बार वे वीडियो कॉल पर फर्जी वर्दी पहनकर या सरकारी दफ्तर जैसी पृष्ठभूमि दिखाकर लोगों को भ्रमित करते हैं। वे पीड़ित को यह भी कहते हैं कि वह किसी से बात न करे जिससे व्यक्ति अकेले में डरकर ठगों की बात मान ले।
पीएम मोदी की स्पष्ट चेतावनी
मन की बात में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई शब्द नहीं है धमकी देने वाले कॉल्स पूरी तरह फर्जी होते हैं उन्होंने कहा डरने की जरूरत नहीं है बल्कि समझदारी से काम लेने की जरूरत है।
नागरिकों के लिए प्रधानमंत्री की सलाह
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को कुछ अहम सुझाव भी दिए किसी भी धमकी भरे कॉल से घबराएं नहीं अपनी निजी जानकारी, OTP या बैंक डिटेल किसी से साझा न करें संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत काट दें परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से सलाह जरूर लें साइबर क्राइम की शिकायत संबंधित पोर्टल या हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं
डिजिटल भारत में सतर्कता जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में साइबर सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने माता-पिता और बुजुर्गों को भी इन नए तरह के ऑनलाइन फ्रॉड के बारे में जानकारी दें।
मन की बात के जरिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि डिजिटल दुनिया में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम पूरी तरह फर्जी है और इससे डरने की जरूरत नहीं है। सही जानकारी धैर्य और समय पर शिकायत करके ऐसे साइबर अपराधों से खुद को और समाज को सुरक्षित रखा जा सकता है।
