देवगढ़ बारिया नगरपालिका में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सोमवार को बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के आठ बागी नेताओं ने निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ मिलकर बहुमत बना लिया। यह कदम उस समय आया जब तीन हफ्ते पहले ही नगरपालिका के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया था।

बागियों ने हासिल किया बहुमत
सोमवार को हुए चुनाव में बीजेपी के बागी नेता नील सोनी को निर्दलीय और कांग्रेस सदस्यों का समर्थन मिला। नील सोनी को कुल 16 वोट मिले, जबकि मौजूदा अध्यक्ष धर्मेश कलाल को केवल 8 वोट मिले। इस तरह सोनी ने नया नगरपालिका अध्यक्ष पद अपने नाम किया।
उपखंड अधिकारी हितेश भगोरा, जिन्होंने इस चुनाव की निगरानी की, ने कहा
“सभी 24 सदस्य मतदान में शामिल हुए। चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुआ।”
राजनीतिक नाटकीयता और अविश्वास प्रस्ताव
17 अक्टूबर को, बोर्ड के 24 में से बहुमत सदस्यों ने धर्मेश कलाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया था। उस समय छह बीजेपी सदस्य भी प्रस्ताव के समर्थन में थे, जबकि एक सदस्य अनुपस्थित रहा था। फरवरी में हुए चुनाव में बीजेपी ने 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था।
अविश्वास प्रस्ताव के बाद धर्मेश कलाल ने गुजरात हाई कोर्ट में स्थगन की याचिका दायर की, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया, जिससे सोमवार को चुनाव का रास्ता साफ हुआ।
निलंबित बीजेपी नेता और सहयोगी
बीजेपी से निलंबित हुए नेताओं में नील सोनी के साथ गोपालसिंह ज़ाला, निधि जैन, सरला मेड़ा, अरुणा परमार और प्रग्नेश मोहानिया शामिल हैं।
नील सोनी को निर्दलीय और कांग्रेस सदस्यों — जैसे मुमताज़ शुक्ला, अयूब शुक्ला, मदिना चांदा, गौरंगकुमार पंड्या, अमरीन परवेज़ मिर्ज़ा आदि — का भी समर्थन मिला।
नील सोनी का बयान
नील सोनी ने मीडिया से कहा
हमने कलाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव इसलिए लाया क्योंकि वे जनता से किए वादे पूरे नहीं कर पाए। यहां तक कि देवगढ़ बारिया की प्रसिद्ध घड़ी टॉवर की घड़ी सात महीने से बंद थी, लेकिन उन्होंने उसे ठीक नहीं करवाया।”
उन्होंने आगे कहा
हम बीजेपी के सच्चे कार्यकर्ता हैं। चाहे पार्टी हमें निलंबित करे या वापस ले, हम पार्टी की विचारधारा के अनुरूप ही काम करेंगे।
पार्टी की प्रतिक्रिया
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है
निष्कर्ष:
देवगढ़ बारिया नगरपालिका में यह राजनीतिक हलचल बीजेपी के अंदर बढ़ते असंतोष और स्थानीय नेतृत्व की विफलता को दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि बागी गुट की नई
टीम जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है
