अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर केवल मध्यपूर्व तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव ऊर्जा बाजार और भारत जैसे आयात निर्भर देशों पर भी पड़ रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है इसलिए इस संघर्ष से तेल गैस और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। नीचे 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं में समझिए कि इस संकट का भारत की ऊर्जा आपूर्ति और पेट्रोल डीजल कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
1.भारत की तेल आयात पर भारी निर्भरता
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है इसलिए कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बड़ा महत्व
मध्यपूर्व का Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। भारत के लगभग आधे से अधिक तेल और गैस आयात इसी रास्ते से आते हैं इसलिए यहां तनाव बढ़ने से आपूर्ति पर खतरा बढ़ जाता है।
3. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
युद्ध के बाद बाजार में तेल की कीमतों में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में अचानक उछाल आया जिससे पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ गई।
4. LPG की कीमतों पर असर
ऊर्जा संकट के चलते भारत में घरेलू रसोई गैस यानी LPG की कीमत में करीब ₹60 प्रति सिलेंडर तक बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने से जुड़ी मानी जा रही है।
5. LNG आपूर्ति में कमी
कतर और अन्य खाड़ी देशों से आने वाली LNG आपूर्ति में भी बाधा आई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार औद्योगिक और गैस वितरण कंपनियों को मिलने वाली आपूर्ति में कटौती की आशंका है।
6. होटल और रेस्तरां उद्योग पर असर
LPG की कमी और कीमतों में वृद्धि के कारण कई शहरों में होटल और रेस्तरां उद्योग पर दबाव बढ़ गया है। कई व्यवसायों ने गैस आपूर्ति की कमी की शिकायत की है।
7. पेट्रोल डीजल कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी नहीं
हालांकि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ी हैं लेकिन भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी की संभावना कम बताई जा रही है क्योंकि तेल कंपनियों के पास कुछ वित्तीय कुशन मौजूद है।
8. भारत के पास सीमित भंडार
भारतीय रिफाइनरियों के पास आमतौर पर 10 -15 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक रहता है। इसके अलावा रणनीतिक भंडार भी हैं जिनसे आपात स्थिति में कुछ समय तक आपूर्ति जारी रखी जा सकती है।
9. वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश
भारत सरकार और तेल कंपनियां अब अमेरिका अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से तेल खरीदने के विकल्प तलाश रही हैं ताकि मध्य पूर्व पर निर्भरता कम की जा सके।
10. अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की वृद्धि से महंगाई बढ़ सकती है और भारत का आयात बिल भी बढ़ जाता है। इससे रुपये और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।
अमेरिका ईरान तनाव ने ऊर्जा बाजार
में अनिश्चितता बढ़ा दी है और भारत जैसे आयात निर्भर देश पर इसका असर दिखाई देने लगा है। हालांकि फिलहाल देश में ईंधन की तत्काल कमी की स्थिति नहीं है लेकिन यदि संघर्ष लंबा चलता है तो पेट्रोल डीजल LPG और LNG की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है ताकि आम उपभोक्ताओं पर इसका असर कम से कम पड़े।











