Uttar Pradesh: माघ मेला 2026 के शाही स्नान पर त्रिवेणी संगम में उमड़ा जनसैलाब

Uttar Pradesh के प्रयागराज में माघ मेला 2026 के शुभारंभ के साथ ही शाही स्नान के अवसर पर त्रिवेणी संगम में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। Ganga Yamuna और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और पुण्य लाभ अर्जित किया। सुबह से ही संगम क्षेत्र में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं

 

Uttar Pradesh: माघ मेला 2026 के शाही स्नान पर त्रिवेणी संगम में उमड़ा जनसैलाब
Uttar Pradesh: माघ मेला 2026 के शाही स्नान पर त्रिवेणी संगम में उमड़ा जनसैलाब: photo by BiharTakk 

देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु

शाही स्नान के लिए न केवल Uttar Pradesh बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु Prayagraj पहुंचे। साधु-संतों अखाड़ों और कल्पवासियों की मौजूदगी ने संगम क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। हर-हर Gange और जय श्रीराम के जयघोष से पूरा इलाका गूंज उठा।

सख्त सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाएं

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। Police PAC और NDRF की टीमें संगम क्षेत्र में तैनात रहीं। ड्रोन और CCTV camera के जरिए भीड़ पर लगातार नजर रखी गई। साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान लागू किया गया।

स्वच्छता और सुविधाओं पर खास ध्यान

माघ मेला 2026 के दौरान स्वच्छता पेयजल शौचालय Medical store और विश्राम स्थलों की व्यापक व्यवस्था की गई है। नगर निगम और मेला प्रशासन की टीमें लगातार सफाई कार्य में जुटी रहीं। श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाए गए।

धार्मिक मान्यता और महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ माह में संगम में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शाही स्नान का विशेष महत्व माना जाता है जिसमें स्नान करने से कई गुना पुण्य फल मिलता है।

प्रशासन ने की अपील

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने अफवाहों से दूर रहने और सहयोग बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने बताया कि माघ मेला पूरे महीने चलेगा और आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। माघ मेला 2026 का शाही स्नान श्रद्धा भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम बनकर उभरा है। त्रिवेणी संगम पर उमड़ी आस्था की यह लहर भारतीय संस्कृति और परंपरा की जीवंत मिसाल है।

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