भारत में कथित वोटर फ्रॉड (मतदान धोखाधड़ी) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मामला एक महिला, उर्मी नाम की सोशल मीडिया यूज़र का है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने दो अलग-अलग राज्यों — पुणे (महाराष्ट्र) और बिहार में मतदान किया।

मामला तब सामने आया जब उर्मी की दो अलग-अलग ‘वोट सेल्फी’ सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर वायरल हो गईं। इन दोनों पोस्टों में उन्होंने अपनी स्याही लगी उंगली दिखाते हुए वोट डालने का दावा किया — लेकिन दोनों तस्वीरें दो अलग-अलग चुनावों और राज्यों की लग रही थीं।
दो तस्वीरें, दो राज्य — एक ही वोटर?
पहली पोस्ट 13 मई 2024 की है, जिसमें उर्मी ने लिखा था
> “Go Vote, Pune! विकास के लिए वोट दिया, स्वच्छ शासन के लिए वोट दिया, मोदीफ़ाइड इंडिया के लिए वोट दिया!”
वहीं दूसरी पोस्ट 6 नवंबर 2025 को आई, जिसमें उन्होंने लिखा
Voted for a Modi-fied India! जाई के वोट डाली, बिहार!”
इन दोनों पोस्टों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हलचल मच गई।
कई कांग्रेस नेताओं ने इन पोस्टों के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इसे “वोट चोरी का सबूत” बताया।
कांग्रेस का आरोप और सोशल मीडिया की बहस
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोन्धे पाटिल ने दोनों तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा —
मैं लोकसभा में महाराष्ट्र में वोट दूँगी, विधानसभा में बिहार में। मोदी के लिए वोट चुराऊँगी।”
इस ट्वीट के बाद मामला और भी गर्म हो गया।
हालाँकि, कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने तर्क दिया कि उर्मी की दूसरी पोस्ट व्यंग्य (sarcasm) में की गई थी, और वास्तव में उन्होंने दो बार वोट नहीं किया।
क्यों बढ़ी विवाद की आग?
दरअसल, मामला उस वक्त और चर्चित हो गया जब हाल ही में राहुल गांधी ने भी मतदाता सूची (voter list) में गड़बड़ी और वोटर फ्रॉड के आरोप लगाए थे।
ऐसे में उर्मी की पोस्ट कांग्रेस के लिए एक “उदाहरण” बन गई, जबकि बीजेपी समर्थक इसे “फर्जी प्रचार” बता रहे हैं।
क्या है सच्चाई?
अब तक किसी आधिकारिक जांच एजेंसी या चुनाव आयोग की ओर से इस मामले पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।
कई यूज़र्स का मानना है कि उर्मी ने सिर्फ़ मीम या मज़ाकिया पोस्ट की थी, जिसे राजनीतिक रंग दे दिया गया।
सोशल मीडिया पर लोगों की राय
कुछ लोगों ने कहा, “अगर ये सच है तो यह गंभीर अपराध है।”
वहीं कुछ ने लिखा, “लोग हर चीज़ को पॉलिटिकल बना देते हैं, शायद ये पोस्ट मज़ाक में की गई थी।
निष्कर्ष: वोट की सेल्फी से छिड़ी राजनीतिक जंग
एक साधारण “वोट सेल्फी” ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक तूफ़ान खड़ा कर दिया।
जहाँ कांग्रेस इसे चुनावी धोखाधड़ी का सबूत बता रही है, वहीं बीजेपी समर्थक इसे भ्रामक प्रचार करार दे रहे हैं।
अब सबकी नज़रें इस बात पर हैं कि क्या चुनाव आयोग इस वायरल पोस्ट की सच्चाई की जाँच करेगा या मामला सिर्फ़ सोशल मीडिया तक सीमित रह जाएगा।
