देश की सबसे बड़ी ट्रांसमिशन कंपनी Power Grid Corporation of India Ltd (PGCIL) ने बिहार के Sasaram HVDC project को अपग्रेड करने का निर्णय लिया है। इस काम पर ₹3,000 करोड़ से अधिक का निवेश होने का अनुमान है।

इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस में बड़ा ऐलान
हाल ही में आयोजित एक निवेशक बैठक में PGCIL के चेयरमैन व CMD आर.के. त्यागी ने बताया कि कंपनी को इस अपग्रेड के लिए इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल चुका है। प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत ₹3,440 Cr बताई जा रही है, जिसे रेगुलेटेड टैरिफ मैकेनिज्म (RTM) के तहत पूरा किया जाएगा।
2002 में शुरू हुआ स्टेशन अब जीवनकाल के अंत के करीब
Sasaram का बैक-टू-बैक HVDC स्टेशन वर्ष 2002 में शुरू हुआ था और अब इसका उपयोगी जीवनकाल लगभग पूरा होने वाला है। इसी वजह से इसे आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करना जरूरी हो गया है।
क्षमता 500 MW से बढ़कर 1000 MW होगी
अपग्रेड के बाद स्टेशन की पावर ट्रांसफर क्षमता 500 मेगावाट 1000 मेगावाट हो जाएगी, यानी सीधी दोगुनी वृद्धि।
इसके साथ ही, पुरानी LCC (Line Commutated Converter) तकनीक की जगह
नई और उन्नत VSC (Voltage Source Converter) तकनीक लगाई जाएगी।
पूरी तरह देसी तकनीक से बनेगा यह project
PGCIL CMD ने बताया कि यह project खास इसलिए भी है क्योंकि पूरी HVDC तकनीक भारत में विकसित की जाएगी
.सेमीकंडक्टर्स
. कन्वर्टर टेक्नोलॉजी
. संपूर्ण सप्लाई चेन
सब कुछ देश के भीतर तैयार होगा।
Sasaram HVDC प्रोजेक्ट का इतिहास
. इस project का उद्घाटन नवंबर 2002 में तत्कालीन pm atl bihari vajpayee ने किया था।
. प्रोजेक्ट का उद्देश्य था पूर्वी क्षेत्र (ER) की अतिरिक्त बिजली को उत्तरी क्षेत्र (NR) तक पहुंचाना।
. यह भारत की नेशनल ग्रिड के पहले चरण का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
जब यह project शुरू हुआ था, तब देश की कुल इंटर-रीजनल ट्रांसफर क्षमता 5,000 MW थी, जो अब बढ़कर 1,20,000 MW से अधिक हो चुकी है।
. स्टेशन में क्या-क्या शामिल है?
. एक 500-MW का HVDC ब्लॉक
. 800 ckm लंबी 400 kV AC ट्रांसमिशन लाइन (बिहार–uttar Pradesh लिंक)
. PGCIL के बिहार शरीफ और इलाहाबाद सबस्टेशन पर अतिरिक्त बे एक्सटेंशन
स्टेशन का DC ऑपरेटिंग वोल्टेज – 205 kV
इस स्टेशन को मूल रूप से GE Grid Solutions (अब GE Vernova) ने तैयार किया था।
बैक-टू-बैक HVDC स्टेशन क्या होता है?
जब HVDC सिस्टम में दोनों कन्वर्टर (AC/DC और DC/AC) एक ही बिल्डिंग में लगे हों और DC लाइन लगभग न के बराबर हो तो उसे बैक-टू-बैक HVDC स्टेशन कहा जाता है।
भारत में ऐसे प्रमुख स्टेशन:
1. Bindhyachal, Madhya pradesh (1989)
2. Chandrapur , Maharashtra (1997)
3. Sasaram, Bihar (2002)
4. गजुवाका, Andhra Pradesh (2005)
