Bharat में एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला बनेगी Pradhanmantri Owaisi के बयान पर सियासी घमासान BJP का तीखा हमला

All India मजलिस ए-इत्तेहादुल Musliman (AIMIM) के प्रमुख और Hyderabad से सांसद Ashduhin Owaisi के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। Owaisi ने कहा कि Bharat में एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला Pradhanmantri बनेगी। उनके इस बयान के सामने आते ही (BJP) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।

 

Bharat में एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला बनेगी Pradhanmantri Owaisi
Bharat में एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला बनेगी Pradhanmantri Owaisi: photo by BiharTakk 

 Owaisi ने क्या कहा?

Owaisi ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि Bharat एक लोकतांत्रिक देश है जहां हर नागरिक को अपनी पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता के साथ आगे बढ़ने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जैसे Bharat में विभिन्न पृष्ठभूमियों से लोग उच्च पदों तक पहुंचे हैं उसी तरह भविष्य में एक हिजाब पहनने वाली महिला भी देश का नेतृत्व कर सकती है।

Owaisi ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि किसी की योग्यता को उसके पहनावे या धार्मिक पहचान से नहीं आंकना चाहिए।

BJP का पलटवार

Owaisi के बयान पर BJP ने तीखी प्रतिक्रिया दी। Party नेताओं ने कहा कि इस तरह के बयान देश को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश हैं। BJP का आरोप है कि Owaisi संवेदनशील मुद्दों को उठाकर समाज में ध्रुवीकरण पैदा करते हैं।

BJP प्रवक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने की योग्यता किसी धार्मिक प्रतीक से नहीं, बल्कि काबिलियत, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रहित से तय होती है। पार्टी ने ओवैसी के बयान को “राजनीतिक एजेंडा” बताते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।

 राजनीतिक बहस और प्रतिक्रियाएं

Owaisi के बयान के बाद राजनीतिक में बहस हो गई है। कुछ नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके बयान को समावेशिता और लोकतंत्र की भावना से जोड़कर समर्थन दिया जबकि अन्य ने इसे अनावश्यक विवाद पैदा करने वाला बयान बताया।

Social media पर भी यह Trend करने लगा जहां एक वर्ग ने इसे महिलाओं के अधिकार और विविधता का प्रतीक बताया तो वहीं दूसरे वर्ग ने इसे धर्म-आधारित राजनीति से जोड़कर आलोचना की।

लोकतंत्र और विविधता का सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद Bharat के लोकतंत्र की उस विशेषता को सामने लाता है जहां विचारों की विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौजूद है। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि ऐसे बयान देते समय राजनीतिक नेताओं को सामाजिक संतुलन का ध्यान रखना चाहिए।

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