Congress Party ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए Mahatma Gandhi राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को कमजोर करने और समाप्त करने की कथित कोशिशों के खिलाफ 5 January से देशव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि यह योजना करोड़ों ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा है और इसे खत्म करना सीधे तौर पर गरीबों पर हमला होगा।

क्या है Congress का आरोप?
Congress नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार बजट कटौती भुगतान में देरी और प्रशासनिक अड़चनों के जरिए MGNREGA को धीरे-धीरे कमजोर कर रही है। पार्टी का दावा है कि इससे ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी बढ़ी है और मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल रही।
Congress का कहना है कि MGNREGA केवल रोजगार योजना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है जिसे खत्म करना सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
5 January से क्या करेगी Congress?
. Congress के मुताबिक इस अभियान के तहत:
. गांव-गांव और Black स्तर पर जनसभाएं आयोजित की जाएंगी
. आम लोगों को MGNREGA के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा
. जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और ज्ञापन दिए जाएंगे
. Social media और Digital Pletform के जरिए सरकार की नीतियों का विरोध किया जाएगा
पार्टी नेतृत्व ने सभी प्रदेश इकाइयों को इस अभियान को मजबूती से चलाने के निर्देश दिए हैं।
Congress नेताओं का बयान
Congress नेताओं ने कहा कि MGNREGA ने ग्रामीण India को संकट के समय सहारा दिया है। इसे कमजोर करना गरीबों मजदूरों और किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
पार्टी का दावा है कि जब-जब देश में आर्थिक संकट आया तब-तब MGNREGA ने करोड़ों परिवारों को रोजगार और सम्मान दिया।
सरकार का रुख
हालांकि केंद्र सरकार पहले भी यह साफ कर चुकी है कि MGNREGA को खत्म करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि योजना को ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सुधार किए जा रहे हैं।
लेकिन Congress इन दावों को नकारते हुए कह रही है कि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह अभियान आगामी चुनावों से पहले ग्रामीण वोट बैंक को साधने की रणनीति भी हो सकता है। MGNREGA हमेशा से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है और इस पर टकराव आगे और तेज हो सकता है।
निष्कर्ष
MGNREGA को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। Congress का देशव्यापी अभियान इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और इसका राजनीतिक असर कितना गहरा पड़ता है।
