
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विदेश दौरे के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। अखिलेश यादव ने एक बार फिर खुला ऑफर दोहराते हुए कहा कि अगर बीजेपी के नेता 100 विधायकों के साथ उनके पास आते हैं तो वे उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने को तैयार हैं।
सरकार के भीतर असंतोष का दाव
अखिलेश यादव ने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के भीतर गहरा असंतोष है। उनके अनुसार कई बीजेपी विधायक मौजूदा सरकार के कामकाज से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोज़गारी महंगाई किसानों की बदहाली और कानून व्यवस्था मुद्दों पर जनता ही नहीं बल्कि बीजेपी के अंदर भी नाराज़गी बढ़ रही है।अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जनता की समस्याओं से ज्यादा प्रचार और नियंत्रणपर ध्यान दे रही है।
पहले भी दिया जा चुका है ऐसा प्रस्ताव
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने ऐसा बयान दिया हो। इससे पहले भी वे कई मौकों पर कह चुके हैं कि अगर बीजेपी के विधायक पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं तो वे वैकल्पिक सरकार के गठन पर विचार कर सकते हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख का कहना है कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करती है और विधायकों के समर्थन से सरकार बनाना पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया है।
बीजेपी का तीखा पलटवार
अखिलेश यादव के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। बीजेपी नेताओं ने इस बयान को राजनीतिक हताशा करार देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी अपनी गिरती राजनीतिक स्थिति से घबराई हुई है। पार्टी का दावा है कि उसके सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और सरकार स्थिर है। बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि विपक्ष इस तरह के बयानों के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
योगी की गैरमौजूदगी पर सियासी बयानबाज़ी
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विदेश में रहने के दौरान यह बयान देना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। हालांकि सरकार की ओर से साफ किया गया है कि मुख्यमंत्री का दौरा पहले से तय था और शासन प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति को लेकर विपक्ष बेवजह राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।
आगामी चुनावों से जुड़ा संदेश
अखिलेश यादव का यह बयान आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया है। इसके जरिए वे न केवल बीजेपी के भीतर संभावित असंतोष को उजागर करना चाहते हैं बल्कि अपने समर्थकों को यह संदेश भी देना चाहते हैं कि समाजवादी पार्टी सत्ता में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं बीजेपी इसे विपक्ष की रणनीतिक बयानबाज़ी मानकर नजरअंदाज़ कर रही है।
योगी आदित्यनाथ के विदेश
दौरे के बीच अखिलेश यादव का यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। हालांकि फिलहाल यह बयान राजनीतिक बयानबाज़ी तक ही सीमित नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या इस बयान का कोई व्यावहारिक असर पड़ता है या यह सिर्फ सियासी दबाव बनाने की रणनीति साबित होती है।